समास किसे कहते हैं? परिभाषा, अर्थ, नियम और उदाहरण सहित आसान व्याख्या

समास हिंदी व्याकरण का ऐसा विषय है, जिसे शुरू में कठिन माना जाता है, लेकिन एक बार इसका मूल नियम समझ में आ जाए तो इसके भेद पहचानना आसान हो जाता है। बोर्ड परीक्षाओं, CTET, UPTET, SSC, रेलवे, पुलिस, बैंक तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में समास से जुड़े प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इसलिए केवल परिभाषा याद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह समझना भी आवश्यक है कि समास बनता कैसे है और उसे पहचाना कैसे जाता है।

‘समास’ शब्द का अर्थ

‘समास’ शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है- ‘संक्षेप’ या ‘छोटा करना’। हिंदी भाषा में इसका प्रयोग विस्तृत वाक्यों को छोटा, सुंदर और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए किया जाता है।

समास की प्रामाणिक परिभाषा

व्याकरण की दृष्टि से: जब दो या दो से अधिक सार्थक शब्द (जिन्हें व्याकरण में ‘पद’ कहा जाता है) अपने बीच की कारक विभक्तियों (जैसे- का, की, के, में, से, पर) का लोप करके एक नया, छोटा और अर्थपूर्ण शब्द बनाते हैं, तो उस प्रक्रिया को समास कहते हैं। सरल शब्दों में, कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक अर्थ प्रकट करना ही समास है।

उदाहरण

सामान्य रूपसमस्त पद
राजा का पुत्रराजपुत्र
वन में रहने वालावनवासी
हाथ से लिखा हुआहस्तलिखित
प्रतिदिनप्रत्येक दिन
माता की भूमिमातृभूमि

ऊपर दिए गए सभी उदाहरणों में वाक्य छोटा हो गया, लेकिन उसका अर्थ वही बना रहा। यही समास की सबसे बड़ी विशेषता है।

‘समास’ शब्द का अर्थ

‘समास’ शब्द का शाब्दिक अर्थ संक्षेप या छोटा करना होता है।

यही कारण है कि हिंदी भाषा में समास का प्रयोग भाषा को अधिक सरल, प्रभावशाली और संक्षिप्त बनाने के लिए किया जाता है।

समास की आवश्यकता क्यों पड़ी?

कल्पना कीजिए कि हर बार हमें इस प्रकार लिखना पड़े

  • राजा का पुत्र
  • वन में रहने वाला
  • देवताओं का आलय
  • हाथ से लिखा हुआ

ऐसे वाक्य बार-बार लिखने से भाषा लंबी हो जाती है।

इसी कारण इनका संक्षिप्त रूप बनाया गया

  • राजपुत्र
  • वनवासी
  • देवालय
  • हस्तलिखित

यही समास का वास्तविक उद्देश्य है।

समास को समझने के लिए चार महत्वपूर्ण शब्द

समास के भेदों पर जाने से पहले इन चार शब्दों को समझ लेना आवश्यक है। आगे पूरा अध्याय इन्हीं के आधार पर चलता है।

  • समस्त पद (सामासिक शब्द)

दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर जो नया शब्द बनता है, उसे समस्त पद कहते हैं।

उदाहरण

राजपुत्र, देवालय, मातृभूमि, जलपान

  • समास विग्रह

समस्त पद को अलग-अलग करके उसका पूरा अर्थ बताना समास विग्रह कहलाता है।

उदाहरण

राजपुत्र → राजा का पुत्र

वनवासी → वन में रहने वाला

देवालय → देवताओं का आलय

3. पूर्वपद

समास से बने शब्द का पहला भाग पूर्वपद कहलाता है।

उदाहरण

राजपुत्र में राज पूर्वपद है।

देवालय में देव पूर्वपद है।

4. उत्तरपद

समास से बने शब्द का दूसरा भाग उत्तरपद कहलाता है।

उदाहरण

राजपुत्र में पुत्र उत्तरपद है।

देवालय में आलय उत्तरपद है।

ध्यान रखने योग्य बात

हर दो शब्दों का एक साथ लिखा जाना समास नहीं होता।

उदाहरण के लिए

  • बड़ा घर
  • लाल फूल
  • मीठा आम

ये समास नहीं हैं क्योंकि इनमें दोनों शब्द स्वतंत्र रूप से प्रयुक्त हुए हैं।

लेकिन

  • राजपुत्र
  • वनवासी
  • देवालय

ये समास हैं क्योंकि इनके बीच की विभक्ति का लोप हुआ है।

कुछ सामान्य उदाहरण

समस्त पदसमास विग्रह
राजपुत्रराजा का पुत्र
वनवासीवन में रहने वाला
जलपानजल का पान
देवालयदेवताओं का आलय
मातृभूमिमाता के समान भूमि
हस्तलिखितहाथ से लिखा हुआ
गृहप्रवेशगृह में प्रवेश
पर्वतारोहणपर्वत पर आरोहण

लेखक की सलाह: अधिकांश विद्यार्थी सीधे समास के भेद याद करना शुरू कर देते हैं। इससे बेहतर तरीका यह है कि पहले शब्द का सही समास विग्रह करना सीखें। यदि विग्रह सही होगा, तो समास का भेद पहचानना भी आसान हो जाएगा।

समास के भेद

samas ke bhed or prakar

अब तक यह तो जान ही गए होंगे कि समास क्या होता है और उसका विग्रह कैसे किया जाता है। अब आगे जानते हैं कि समास के कितने भेद होते हैं और उन्हें पहचानने का सबसे आसान तरीका क्या है।

हिंदी व्याकरण में समास के छह मुख्य भेद माने गए हैं।

  1. अव्ययीभाव समास
  2. तत्पुरुष समास
  3. कर्मधारय समास
  4. द्विगु समास
  5. द्वंद्व समास
  6. बहुव्रीहि समास

हर समास की अपनी अलग पहचान होती है। यदि आप केवल एक नियम याद रखें, तो अधिकांश प्रश्न आसानी से हल हो सकते हैं।

1. अव्ययीभाव समास

जिस समास में पहला पद (पूर्वपद) प्रधान होता है और वह कोई अव्यय या उपसर्ग होता है, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। समस्त पद बनने के बाद पूरा शब्द प्रायः क्रियाविशेषण की तरह कार्य करता है।

पहचान कैसे करें?

यदि शब्द की शुरुआत यथा, प्रति, आ, भर, बे, हर आदि से हो या एक ही शब्द की पुनरावृत्ति हो, तो वहाँ अव्ययीभाव समास होने की संभावना रहती है।

उदाहरण

समस्त पदसमास विग्रह
प्रतिदिनप्रत्येक दिन
यथाशक्तिशक्ति के अनुसार
भरपेटपेट भरकर
आजन्मजन्म से लेकर
साफ-साफपूरी तरह साफ
रातोंरातएक ही रात में

ध्यान दें

प्रतिदिन का अर्थ “हर दिन” होता है।

भरपेट का अर्थ “पेट भरकर” होता है।

इन शब्दों में पहला पद पूरे शब्द का अर्थ निर्धारित करता है।

2. तत्पुरुष समास

जिस समास में दूसरा पद (उत्तरपद) प्रधान होता है तथा दोनों पदों के बीच की कारक विभक्ति (का, की, के, को, से, में, पर, के लिए आदि) का लोप हो जाता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।

यह हिंदी व्याकरण का सबसे अधिक पूछा जाने वाला समास है।

पहचान कैसे करें?

यदि समास विग्रह करते समय बीच में

  1. का
  2. की
  3. के
  4. को
  5. से
  6. में
  7. पर
  8. के लिए

जैसे शब्द आएँ, तो अधिकांश मामलों में वह तत्पुरुष समास होगा।

उदाहरण

समस्त पदसमास विग्रह
राजपुत्रराजा का पुत्र
वनवासीवन में रहने वाला
जलपानजल का पान
देवालयदेवताओं का आलय
पापमुक्तपाप से मुक्त
स्वर्गप्राप्तस्वर्ग को प्राप्त
गृहप्रवेशगृह में प्रवेश
हस्तलिखितहाथ से लिखा हुआ

तत्पुरुष समास के प्रमुख उपभेद

प्रतियोगी परीक्षाओं में कई बार सीधे तत्पुरुष नहीं, बल्कि उसके उपभेद पूछे जाते हैं।

उपभेदपहचानउदाहरण
कर्म तत्पुरुष‘को’ का लोपस्वर्गप्राप्त
करण तत्पुरुष‘से’ का लोपहस्तलिखित
संप्रदान तत्पुरुष‘के लिए’ का लोपरसोईघर
अपादान तत्पुरुष‘से अलग’पापमुक्त
संबंध तत्पुरुष‘का, की, के’ का लोपराजपुत्र
अधिकरण तत्पुरुष‘में, पर’ का लोपवनवासी

इन उपभेदों को रटने की आवश्यकता नहीं है। पहले समास विग्रह कीजिए, फिर देखिए कि कौन-सी विभक्ति छिपी हुई है। उत्तर स्वयं मिल जाएगा।

विद्यार्थी सबसे अधिक कहाँ गलती करते हैं?

अधिकांश छात्र राजपुत्र, वनवासी और देवालय जैसे शब्दों को देखकर सीधे समास का नाम याद करने लगते हैं। यह सही तरीका नहीं है।

पहले उनका विग्रह करें

  • राजपुत्र → राजा का पुत्र
  • वनवासी → वन में रहने वाला
  • पापमुक्त → पाप से मुक्त

अब विभक्ति स्वयं बता रही है कि यह तत्पुरुष समास है।

इसी कारण प्रतियोगी परीक्षाओं में नए शब्द आने पर भी भ्रम नहीं होता।

3. कर्मधारय समास

जिस समास में उत्तरपद प्रधान होता है तथा पूर्वपद उसकी विशेषता बताता है या दोनों पदों में उपमान-उपमेय का संबंध होता है, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।

सरल शब्दों में कहें तो, इसमें पहला शब्द दूसरे शब्द का गुण, रंग, रूप, आकार या तुलना बताता है।

पहचान कैसे करें?

समास विग्रह करने पर सामान्यतः

  • है जो
  • के समान

जैसे शब्द आते हैं।

उदाहरण

समस्त पदसमास विग्रह
नीलकमलनीला है जो कमल
महापुरुषमहान है जो पुरुष
चंद्रमुखचंद्रमा के समान मुख
मृगनयनमृग के समान नयन
कृष्णसर्पकाला है जो सर्प
पीतांबरपीला है जो अंबर (वस्त्र)

ध्यान देने योग्य बात

यदि कोई शब्द केवल किसी वस्तु की विशेषता बता रहा है, तो वह प्रायः कर्मधारय समास होगा।

उदाहरण

  • नीलकमल → नीला कमल
  • महापुरुष → महान पुरुष
  • मृगनयन → हिरण जैसे नेत्र

विद्यार्थी कहाँ भ्रमित होते हैं?

पीतांबर और नीलकंठ जैसे शब्द कई बार कर्मधारय भी लगते हैं और बहुव्रीहि भी।

यदि केवल वस्त्र या गले की विशेषता बताई जा रही है, तो कर्मधारय होगा।

लेकिन यदि वही शब्द भगवान कृष्ण या भगवान शिव के अर्थ में प्रयोग किया जाए, तो वह बहुव्रीहि समास माना जाएगा।

इसी कारण प्रश्न का संदर्भ ध्यान से पढ़ना आवश्यक है।

4. द्विगु समास

जिस समास में पहला पद संख्यावाचक होता है और पूरा शब्द किसी समूह, समाहार या संग्रह का बोध कराता है, उसे द्विगु समास कहते हैं।

यह समास पहचानना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है।

पहचान कैसे करें?

इन दो बातों पर ध्यान दें

  • पहला पद कोई संख्या हो।
  • पूरा शब्द किसी समूह या समाहार का अर्थ दे।

यदि केवल संख्या है लेकिन समूह नहीं है, तो हर बार द्विगु समास नहीं होगा।

उदाहरण

समस्त पदसमास विग्रह
नवग्रहनौ ग्रहों का समूह
त्रिभुजतीन भुजाओं का समाहार
चौराहाचार राहों का समाहार
सप्ताहसात दिनों का समूह
पंचतंत्रपाँच तंत्रों का समूह
शताब्दीसौ वर्षों का समूह

द्विगु समास को पहचानने की आसान ट्रिक

पहले स्वयं से दो प्रश्न पूछिए

पहला: क्या पहला शब्द कोई संख्या बता रहा है?

यदि हाँ, तो दूसरा प्रश्न पूछिए।

दूसरा: क्या पूरा शब्द किसी समूह या समाहार का अर्थ देता है?

यदि दोनों का उत्तर हाँ है, तो वह द्विगु समास होगा।

विद्यार्थी की सामान्य गलती

कई विद्यार्थी त्रिलोचन देखकर केवल “त्रि” (तीन) के कारण उसे द्विगु समास मान लेते हैं।

यह सही नहीं है।

त्रिलोचन का अर्थ है

तीन नेत्र वाला (भगवान शिव)

यह किसी समूह का बोध नहीं कराता, बल्कि एक विशेष व्यक्ति की ओर संकेत करता है।

इसलिए यह बहुव्रीहि समास है, द्विगु नहीं।

त्वरित तुलना

कर्मधारयद्विगु
विशेषता बताता हैसंख्या बताता है
गुण या तुलना होती हैसमूह या समाहार होता है
नीलकमल, महापुरुषनवग्रह, सप्ताह

लेखक की सलाह: यदि किसी शब्द में संख्या दिखाई दे, तो तुरंत द्विगु समास मत मानिए। पहले यह अवश्य देखिए कि वह संख्या किसी समूह का बोध करा रही है या किसी विशेष व्यक्ति का। यही छोटी-सी सावधानी परीक्षा में कई अंक बचा सकती है।

द्वंद्व समास और बहुव्रीहि समास: परिभाषा, पहचान और उदाहरण

अब तक आपने अव्ययीभाव, तत्पुरुष, कर्मधारय और द्विगु समास के बारे में पढ़ लिया। अब हम शेष दो समासों को समझेंगे। प्रतियोगी परीक्षाओं में इन दोनों से भी नियमित रूप से प्रश्न पूछे जाते हैं, विशेषकर बहुव्रीहि समास से।

5. द्वंद्व समास

जिस समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं तथा विग्रह करने पर उनके बीच और, या, अथवा जैसे संयोजक शब्द आते हैं, उसे द्वंद्व समास कहते हैं।

सरल शब्दों में कहें तो, जहाँ दोनों शब्दों का महत्व बराबर हो और कोई भी शब्द दूसरे पर निर्भर न हो, वहाँ द्वंद्व समास होता है।

द्वंद्व समास की पहचान

यदि समास विग्रह करते समय

  • और
  • या
  • अथवा

जैसे शब्द आते हैं, तो वह सामान्यतः द्वंद्व समास होता है।

उदाहरण

समस्त पदसमास विग्रह
माता-पितामाता और पिता
दिन-रातदिन और रात
सुख-दुःखसुख और दुःख
अन्न-जलअन्न और जल
पाप-पुण्यपाप या पुण्य
धर्माधर्मधर्म या अधर्म

ध्यान देने योग्य बात

द्वंद्व समास में कई बार दोनों शब्दों के बीच योजक चिह्न (-) दिखाई देता है, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता।

उदाहरण

  • माता-पिता
  • दिन-रात

जबकि

  • धर्माधर्म
  • शीतोष्ण

में योजक चिह्न नहीं है, फिर भी ये द्वंद्व समास हैं।

विद्यार्थी अक्सर कहाँ गलती करते हैं?

कुछ विद्यार्थी केवल योजक चिह्न देखकर ही द्वंद्व समास पहचानते हैं।

यह सही तरीका नहीं है।

हमेशा विग्रह कीजिए।

यदि विग्रह में और, या या अथवा आए, तो द्वंद्व समास होने की संभावना अधिक होती है।

6. बहुव्रीहि समास

जिस समास में न तो पूर्वपद प्रधान होता है और न ही उत्तरपद, बल्कि दोनों मिलकर किसी तीसरे व्यक्ति, वस्तु या विशेष अर्थ का बोध कराते हैं, उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं।

यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है।

बहुव्रीहि समास की पहचान

समास विग्रह करने पर प्रायः

  • जिसका
  • जिसकी
  • जिसके
  • वह

जैसे शब्द आते हैं।

समस्त पद का अर्थ सीधे दोनों शब्दों से नहीं निकलता, बल्कि किसी तीसरे व्यक्ति की ओर संकेत करता है।

उदाहरण

समस्त पदसमास विग्रह
दशाननदस मुख हैं जिसके (रावण)
लंबोदरलंबा उदर है जिनका (गणेश जी)
त्रिलोचनतीन नेत्र हैं जिनके (भगवान शिव)
गजाननहाथी के समान मुख है जिनका (गणेश जी)
चतुर्भुजचार भुजाएँ हैं जिसके (भगवान विष्णु)
पीतांबरपीले वस्त्र हैं जिसके (भगवान कृष्ण)

बहुव्रीहि समास को कैसे पहचानें?

एक छोटा-सा प्रश्न स्वयं से पूछिए

क्या यह शब्द किसी तीसरे व्यक्ति या विशेष पहचान की ओर संकेत कर रहा है?

यदि उत्तर हाँ है, तो वह बहुव्रीहि समास हो सकता है।

कर्मधारय और बहुव्रीहि में अंतर

इस टॉपिक से प्रश्न लगभग हर परीक्षा या प्रतियोगी परीक्षा में किसी न किसी तरीके से घुमा फिरा कर पुछा जाता है।

कर्मधारयबहुव्रीहि
विशेषता बताता हैकिसी तीसरे व्यक्ति का बोध कराता है
पहला पद दूसरे की विशेषता हैदोनों पद मिलकर अलग अर्थ देते हैं
नीलकमललंबोदर
महापुरुषदशानन
मृगनयनत्रिलोचन

उदाहरण से समझिए

नीलकमल

नीला है जो कमल

यहाँ केवल कमल का रंग बताया गया है।

समास: कर्मधारय

त्रिलोचन

तीन नेत्र हैं जिसके (भगवान शिव)

यहाँ किसी विशेष व्यक्ति की ओर संकेत किया गया है।

समास: बहुव्रीहि

पीतांबर

यदि अर्थ हो

पीला है जो वस्त्र

तो कर्मधारय

लेकिन यदि अर्थ हो

पीले वस्त्र धारण करने वाले भगवान श्रीकृष्ण

तो बहुव्रीहि

इसलिए प्रश्न का संदर्भ अवश्य देखें।

एक छोटी-सी सलाह

यदि किसी शब्द का अर्थ पढ़ते समय आपके मन में किसी विशेष व्यक्ति, देवता या प्रसिद्ध पात्र की छवि बन रही है, तो पहले बहुव्रीहि समास की संभावना अवश्य जाँचिए। प्रतियोगी परीक्षाओं में यही सबसे सामान्य भ्रम होता है।

अब तक आपने क्या सीखा?

अब आप समास के सभी छह भेद पढ़ चुके हैं

  • अव्ययीभाव समास
  • तत्पुरुष समास
  • कर्मधारय समास
  • द्विगु समास
  • द्वंद्व समास
  • बहुव्रीहि समास

अगले भाग में हम समास की पहचान करने की आसान ट्रिक्स, विद्यार्थियों की सामान्य गलतियाँ, समास विग्रह करने का सही तरीका और परीक्षा में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

समास की पहचान कैसे करें? आसान नियम, सामान्य गलतियाँ और याद रखने की ट्रिक्स

अब तक आपने समास के सभी छह भेदों को समझ लिया है। लेकिन परीक्षा में अक्सर प्रश्न सीधे परिभाषा नहीं पूछते, बल्कि कोई शब्द देकर उसका समास पहचानने के लिए कहते हैं। ऐसे में केवल परिभाषाएँ याद होना पर्याप्त नहीं होता। सही उत्तर तक पहुँचने का सबसे अच्छा तरीका है समास विग्रह करना

समास पहचानने का सबसे आसान तरीका

जब भी कोई सामासिक शब्द सामने आए, उसे देखते ही उसका प्रकार बताने की कोशिश न करें। पहले उसका समास विग्रह कीजिए।

उदाहरण के लिए यदि शब्द वनवासी दिया है, तो पहले सोचिए

वनवासी = वन में रहने वाला

अब यहाँ “में” शब्द दिखाई दे रहा है। इससे स्पष्ट है कि यह तत्पुरुष समास है।

इसी प्रकार

माता-पिता = माता और पिता

यहाँ “और” आया, इसलिए यह द्वंद्व समास है।

यही तरीका लगभग हर प्रश्न पर लागू होता है।

समास विग्रह करने की सही प्रक्रिया

यदि कोई नया शब्द दिया जाए, तो इन चार चरणों का पालन करें।

पहला चरण

समस्त पद को ध्यान से पढ़िए।

उदाहरण:

जलपान

दूसरा चरण

शब्द को अलग-अलग कीजिए।

जल + पान

तीसरा चरण

दोनों शब्दों के बीच छिपे संबंध को पहचानिए।

जल का पान

चौथा चरण

अब समास का प्रकार तय कीजिए।

यहाँ “का” आया है, इसलिए यह तत्पुरुष समास है।

परीक्षा में सबसे पहले क्या देखें?

हर शब्द के लिए यह क्रम अपनाइए

क्या संख्या है?

यदि हाँ, तो पहले द्विगु की संभावना देखें।

क्या “और” या “या” आ रहा है?

यदि हाँ, तो द्वंद्व हो सकता है।

क्या “का, की, के, में, से” आ रहा है?

तो तत्पुरुष की संभावना अधिक है।

क्या पहला शब्द किसी विशेषता का बोध करा रहा है?

तो कर्मधारय हो सकता है।

क्या किसी तीसरे व्यक्ति या विशेष अर्थ की ओर संकेत है?

तो बहुव्रीहि पर विचार करें।

क्या पहला पद अव्यय है?

तो अव्ययीभाव समास देखें।

विद्यार्थी सबसे अधिक कहाँ गलती करते हैं?

समास पढ़ते समय कुछ गलतियाँ लगभग हर विद्यार्थी करता है।

गलती 1

पहले समास का नाम याद करना।

सही तरीका है

पहले विग्रह करें, फिर समास पहचानें।

गलती 2

संख्या देखकर हर बार द्विगु मान लेना।

उदाहरण

त्रिलोचन

कई विद्यार्थी इसे द्विगु मान लेते हैं।

जबकि इसका अर्थ है

तीन नेत्र हैं जिसके (भगवान शिव)

इसलिए यह बहुव्रीहि समास है।

गलती 3

योजक चिह्न देखकर ही द्वंद्व मान लेना।

उदाहरण

धर्माधर्म

इसमें योजक चिह्न नहीं है।

फिर भी यह द्वंद्व समास है।

इसलिए हमेशा विग्रह करें।

गलती 4

विशेषता और विशेष व्यक्ति में अंतर न समझना।

उदाहरण

पीतांबर

यदि अर्थ केवल पीले वस्त्र है

तो कर्मधारय।

यदि अर्थ भगवान श्रीकृष्ण है

तो बहुव्रीहि।

समास याद रखने की आसान ट्रिक्स

हर समास का एक छोटा संकेत याद रखिए।

समासपहचान
अव्ययीभावपहला पद अव्यय
तत्पुरुषका, की, के, में, से आदि
कर्मधारयविशेषता या तुलना
द्विगुसंख्या + समूह
द्वंद्वऔर / या
बहुव्रीहितीसरा अर्थ

यदि ये छह संकेत याद हैं, तो अधिकांश प्रश्न हल हो जाते हैं।

समास और संधि में अंतर

कई विद्यार्थी समास और संधि को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग विषय हैं।

समाससंधि
दो शब्द मिलते हैंदो वर्ण मिलते हैं
अर्थ में संबंध होता हैध्वनि में परिवर्तन होता है
विग्रह किया जाता हैसंधि-विच्छेद किया जाता है
उदाहरण: राजपुत्रउदाहरण: देव + इन्द्र = देवेन्द्र

समास और सामान्य संयुक्त शब्द में अंतर

हर संयुक्त शब्द समास नहीं होता।

शब्दसमास है या नहीं
राजपुत्रसमास
वनवासीसमास
बड़ा घरसमास नहीं
लाल फूलसमास नहीं
ठंडा पानीसमास नहीं

इन उदाहरणों में “बड़ा”, “लाल” और “ठंडा” केवल विशेषण हैं। इनके बीच किसी विभक्ति का लोप नहीं हुआ है।

समास के महत्वपूर्ण उदाहरण (विग्रह और भेद सहित)

समास को समझने का सबसे अच्छा तरीका अधिक से अधिक उदाहरणों का अभ्यास करना है। नीचे दिए गए उदाहरणों में प्रत्येक शब्द का समास विग्रह और समास का प्रकार भी बताया गया है, ताकि आपको एक साथ तीन बातें समझ में आ जाएँ।

तत्पुरुष समास के उदाहरण

अव्ययीभाव समास के उदाहरण

समस्त पदसमास विग्रह
प्रतिदिनप्रत्येक दिन
यथाशक्तिशक्ति के अनुसार
भरपेटपेट भरकर
आजन्मजन्म से लेकर
बेधड़कधड़क के बिना
रातोंरातएक ही रात में
आमरणमृत्यु तक
यथासंभवसंभव के अनुसार
यथाक्रमक्रम के अनुसार
आमने-सामनेसामने-सामने

कर्मधारय समास के उदाहरण

समस्त पदसमास विग्रह
महापुरुषमहान है जो पुरुष
नीलकमलनीला है जो कमल
मृगनयनमृग के समान नयन
चंद्रमुखचंद्रमा के समान मुख
कृष्णसर्पकाला है जो सर्प
पीतवस्त्रपीले हैं जो वस्त्र
रक्तकमललाल है जो कमल
विशालभवनविशाल है जो भवन
मधुरवाणीमधुर है जो वाणी
शुभकार्यशुभ है जो कार्य

द्विगु समास के उदाहरण

समस्त पदसमास विग्रह
नवग्रहनौ ग्रहों का समूह
त्रिभुजतीन भुजाओं का समूह
सप्ताहसात दिनों का समूह
पंचतंत्रपाँच तंत्रों का समूह
शताब्दीसौ वर्षों का समूह
चौराहाचार राहों का समूह
द्विचक्रदो चक्कों का समूह
त्रिवेणीतीन नदियों का संगम
सप्तर्षिसात ऋषियों का समूह
त्रिलोकतीन लोकों का समूह

द्वंद्व समास के उदाहरण

समस्त पदसमास विग्रह
माता-पितामाता और पिता
दिन-रातदिन और रात
सुख-दुःखसुख और दुःख
अन्न-जलअन्न और जल
पाप-पुण्यपाप या पुण्य
धर्माधर्मधर्म या अधर्म
नर-नारीनर और नारी
जीवन-मरणजीवन और मरण
राजा-रानीराजा और रानी
घर-बाहरघर और बाहर

बहुव्रीहि समास के उदाहरण

समस्त पदसमास विग्रह
दशाननदस मुख हैं जिसके (रावण)
लंबोदरलंबा उदर है जिनका (गणेश)
त्रिलोचनतीन नेत्र हैं जिसके (शिव)
गजाननहाथी जैसा मुख है जिनका (गणेश)
चतुर्भुजचार भुजाएँ हैं जिसके (विष्णु)
पीतांबरपीले वस्त्र हैं जिसके (श्रीकृष्ण)
नीलकंठनीला कंठ है जिसके (शिव)
चक्रपाणिचक्र है हाथ में जिसके (विष्णु)
कमलनयनकमल के समान नेत्र हैं जिसके (विष्णु)

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